छठ पूजा क्या है, और बच्चे को कैसे समझाएं?
छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया को प्रकाश, गर्मी, अन्न और अच्छे स्वास्थ्य के लिए धन्यवाद कहने का पर्व है। परिवार नदी या तालाब में खड़े होकर एक शाम डूबते सूर्य को और अगली सुबह उगते सूर्य को जल, फल और प्रसाद का अर्घ्य देते हैं। 2026 में छठ पूजा 13 से 16 नवंबर तक है।
हर उम्र के लिए एक लाइन में छठ
- 2–5 वर्ष: "छठ पर हम सूरज को रोशनी और खाना देने के लिए धन्यवाद कहते हैं।"
- 6–8 वर्ष: "छठ पर परिवार सूर्य देव और छठी मैया को धन्यवाद कहते हैं। हम फल और ठेकुआ की टोकरी लेकर घाट जाते हैं और डूबते और उगते सूरज की पूजा करते हैं।"
- 9–10 वर्ष: "छठ पूजा दिवाली के छह दिन बाद आती है। यह सूर्य उपासना की सबसे पुरानी परंपराओं में से एक है, और व्रत रखने वाले लगभग 36 घंटे बिना पानी के उपवास करते हैं।"
छठ पर हम किसकी पूजा करते हैं?
हम सूर्य देव की पूजा करते हैं, जो धरती पर सब को प्रकाश और जीवन देते हैं। साथ ही छठी मैया की पूजा होती है, जिन्हें बच्चों की रक्षा करने वाली और परिवार को स्वास्थ्य का आशीर्वाद देने वाली माँ माना जाता है। उनका नाम षष्ठी से आया है, यानी कार्तिक शुक्ल पक्ष का छठा दिन, जब पर्व की मुख्य संध्या होती है।
छठ पूजा के चार दिन (2026)
| दिन | 2026 की तारीख़ | परिवार क्या करते हैं |
|---|---|---|
| नहाय-खाय | शुक्र 13 नवंबर | नदी या घर में स्नान, घर की सफ़ाई, और एक सादा, शुद्ध भोजन, अक्सर लौकी, चने की दाल और चावल। |
| खरना | शनि 14 नवंबर | व्रती दिन भर उपवास करते हैं, शाम को गुड़ की खीर और रोटी खाते हैं। फिर लंबा उपवास शुरू होता है। |
| संध्या अर्घ्य | रवि 15 नवंबर | परिवार घाट पर जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। |
| उषा अर्घ्य | सोम 16 नवंबर | भोर से पहले परिवार फिर घाट पर जाकर उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इसके बाद व्रत खुलता है। |
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय शहर के अनुसार बदलता है, इसलिए अर्घ्य का समय अपने स्थानीय पंचांग में देखें।
हम डूबते सूरज की पूजा क्यों करते हैं?
यह बच्चों के लिए एक सुंदर सीख है। ज़्यादातर लोग शुरुआत का उत्सव मनाते हैं। छठ पर हम सूरज को उगते हुए ही नहीं, डूबते हुए भी धन्यवाद कहते हैं। यह सिखाता है कि जो हमें मिल चुका है, उसके लिए भी आभारी रहें, सिर्फ़ आने वाले के लिए नहीं।
छठ की कथाएँ
परिवार अक्सर बच्चों को ये कथाएँ सुनाते हैं:
- सीता जी और श्री राम: कई परिवार मानते हैं कि अयोध्या लौटने के बाद सीता जी और श्री राम ने इसी दिन व्रत रखकर सूर्य की पूजा की थी।
- कर्ण: महाभारत में सूर्यपुत्र कर्ण रोज़ जल में खड़े होकर सूर्य की पूजा करते थे, ठीक वैसे ही जैसे परिवार छठ पर करते हैं।
- द्रौपदी और पांडव: महाभारत में वनवास के समय पांडवों ने सूर्य देव की उपासना की, और उन्होंने उन्हें अक्षय पात्र दिया, जिसका भोजन कभी ख़त्म नहीं होता था।
स्रोत: महाभारत, वन पर्व (अक्षय पात्र)। सीता जी और कर्ण का छठ से संबंध व्यापक रूप से मानी जाने वाली परंपरा है।
छठ के सूप में क्या होता है?
प्रसाद बाँस की टोकरी, यानी सूप या दौरा में ले जाया जाता है। इसमें आमतौर पर ठेकुआ (गेहूँ के आटे और गुड़ की मिठाई), गन्ना, केला, नारियल, मौसमी और एक दीया होता है। बच्चों को सूप सजाना बहुत अच्छा लगता है।
बच्चे कैसे शामिल हो सकते हैं?
- ठेकुआ बनाने और सूप सजाने में मदद करें।
- परिवार के साथ छठ के पारंपरिक लोकगीत गाएँ।
- घाट पर किसी बड़े का हाथ पकड़कर अर्घ्य देखें।
- बच्चे उपवास नहीं रखते; व्रत बड़े रखते हैं।
- पानी के पास कोई बड़ा हमेशा छोटे बच्चों का हाथ पकड़े रखे।
माता-पिता के सवाल
छठ पूजा कहाँ मनाई जाती है? सबसे ज़्यादा बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के मधेश में। इन क्षेत्रों के परिवार दुनिया भर में झीलों, समुद्र तटों या घर में ही टब में छठ मनाते हैं।
क्या छठ और दिवाली एक ही हैं? नहीं। छठ दिवाली के छह दिन बाद आती है। दिवाली पर दीयों से श्री राम और लक्ष्मी जी की पूजा होती है; छठ पर जल और फल से सूर्य और छठी मैया को धन्यवाद कहा जाता है।
छठ पर मूर्ति क्यों नहीं होती? क्योंकि सूर्य देव स्वयं हमारे सामने चमकते हैं। परिवार सीधे आकाश में सूर्य की पूजा करते हैं।
प्रथम प्रणाम पर सुनिए
प्रथम प्रणाम के उत्सव खंड में छठ पूजा की कथा और साथ मिलकर करने की गतिविधि पाएँ।