ॐ नमः शिवाय का अर्थ क्या है?
ॐ नमः शिवाय का अर्थ है "मैं शिव जी को प्रणाम करता हूँ।" "नमः" यानी "मैं झुकता हूँ" और "शिवाय" यानी "शिव को", जिनके नाम का अर्थ है "कल्याणकारी, दयालु"। यह हिंदू परंपरा के सबसे छोटे और प्रिय मंत्रों में से एक है, और बच्चे इसे कभी भी बोलकर शांति और भगवान का साथ महसूस कर सकते हैं।
मंत्र, शब्द-दर-शब्द
ॐ नमः शिवाय
| शब्द | बच्चों के लिए अर्थ |
|---|---|
| ॐ | सबसे पहली और सबसे पवित्र ध्वनि, सारी सृष्टि की ध्वनि |
| नमः | मैं प्रेम और आदर से झुकता हूँ |
| शिवाय | शिव जी को, जो दयालु और कल्याणकारी हैं |
ॐ के बिना पाँच अक्षर न-मः-शि-वा-य पंचाक्षर मंत्र कहलाते हैं। कई परिवार सिखाते हैं कि ये पाँच अक्षर पाँच तत्वों के प्रतीक हैं: धरती, जल, अग्नि, वायु और आकाश।
ॐ नमः शिवाय कहाँ से आया?
नमः शिवाय शब्द कृष्ण यजुर्वेद (तैत्तिरीय संहिता 4.5) के श्री रुद्रम् में आते हैं, जो शिव जी की स्तुति है। शिव पुराण पंचाक्षर मंत्र को शिव जी को याद करने का सबसे सरल तरीका बताता है, जो सबके लिए खुला है।
शिव जी कौन हैं? बच्चों के लिए एक चित्र
शिव जी बर्फ़ीले कैलाश पर्वत पर पार्वती माँ, गणेश जी और कार्तिकेय जी के साथ रहते हैं। बच्चे उन्हें इनसे पहचान सकते हैं:
- जटाओं में अर्धचंद्र, और उनसे बहती गंगा।
- माथे पर तीसरी आँख।
- त्रिशूल और छोटा-सा डमरू।
- गले में प्यार से लिपटा नाग।
- नीला कंठ, इसीलिए वे नीलकंठ कहलाते हैं।
- नंदी बैल, जो उनका वाहन है।
शिव जी को भोलेनाथ भी कहते हैं, क्योंकि वे सरलता से प्रसन्न हो जाते हैं और सच्चे मन से पुकारने वाले हर किसी से प्रेम करते हैं।
बच्चे के साथ ॐ नमः शिवाय का जप कैसे करें
- आराम से बैठें और आँखें बंद करें।
- धीरे से साँस लें। साँस छोड़ते हुए धीरे से "ॐ नमः शिवाय" बोलें।
- छोटे बच्चे 5 या 11 बार दोहराएं। बड़े बच्चे माला पर 108 बार कर सकते हैं।
- महसूस करें। पूछें, "क्या तुम्हें शांति महसूस हो रही है?"
यह सोने से पहले, परीक्षा से पहले, या बच्चे के परेशान होने पर बहुत अच्छा काम करता है। कई परिवार शिव जी को समर्पित सोमवार और महाशिवरात्रि पर भी इसका जप करते हैं।
माता-पिता के सवाल
क्या बच्चे कभी भी ॐ नमः शिवाय बोल सकते हैं? हाँ। परंपरा में इसे सबके लिए, किसी भी समय, बिना किसी ख़ास नियम के खुला माना जाता है। कितनी बार से ज़्यादा ज़रूरी है प्रेम से बोलना।
शिव जी का कंठ नीला क्यों है? जब देवों और असुरों ने क्षीरसागर का मंथन किया, तो एक भयानक विष निकला जो पूरी दुनिया को नुकसान पहुँचा सकता था। शिव जी ने सबकी रक्षा के लिए उसे पी लिया, और पार्वती माँ ने उसे उनके कंठ में ही रोक दिया, जिससे कंठ नीला हो गया। इसीलिए वे नीलकंठ कहलाते हैं। (स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण, अष्टम स्कंध, अध्याय 7।)
क्या ॐ नमः शिवाय सिर्फ़ शैव परिवारों के लिए है? नहीं। हर परंपरा के परिवार इसका जप करते हैं। हिंदू परंपरा शिव जी, विष्णु जी और देवी को एक ही दिव्य के रूप मानती है।
प्रथम प्रणाम पर सीखें
प्रथम प्रणाम की मंत्र शाला में ॐ नमः शिवाय को धीरे, शांत स्वर में, अर्थ के साथ सुनिए।