बाल हनुमान और सूर्य की कथा क्या है?

जब हनुमान जी छोटे थे, तो उन्होंने उगते हुए लाल सूर्य को देखा और उसे पका हुआ फल समझ लिया। वे उसे खाने के लिए आकाश में कूद पड़े। इंद्र देव ने अपने वज्र से उन्हें रोका, और बाल हनुमान की ठोड़ी, यानी "हनु", पर चोट लगी। इसी से उनका नाम हनुमान पड़ा। फिर देवताओं ने उन्हें अपार शक्ति का वरदान दिया।

कथा

बहुत पहले, फलों से भरे एक वन में मारुति नाम का एक नन्हा बालक रहता था। उसकी माँ अंजना थीं और पिता पवन देव, हवा के देवता। पवन का पुत्र होने के कारण मारुति सबसे ऊँचा कूद सकता था।

एक सुबह मारुति को भूख लगी। उसने ऊपर देखा तो सूर्य उग रहा था, गोल और लाल, दुनिया के सबसे रसीले आम जैसा। "नाश्ता!" उसने सोचा। और एक बड़ी छलांग में वह ऊपर, और ऊपर, सूर्य की ओर उड़ चला।

देवता हैरान होकर देखते रहे। देवराज इंद्र को चिंता हुई कि यह नन्हा बालक सूर्य को निगल लेगा और दुनिया में अँधेरा हो जाएगा। उन्होंने उसे रोकने के लिए अपना वज्र चलाया। वज्र बालक की ठोड़ी पर लगा, और वह धीरे से धरती पर आ गिरा।

पवन देव इतने दुखी हुए कि उन्होंने बहना बंद कर दिया। हवा के बिना कोई साँस नहीं ले पा रहा था। सारे देवता सब ठीक करने दौड़े। ब्रह्मा जी ने बालक को स्वस्थ किया, और हर देवता ने उसे वरदान दिया: शक्ति, गति, बुद्धि और हर संकट से रक्षा। क्योंकि उनकी ठोड़ी, यानी हनु, पर चोट लगी थी, इसलिए उनका नाम हनुमान पड़ा।

स्रोत: वाल्मीकि रामायण, किष्किन्धा कांड (सर्ग 66, जहाँ जाम्बवान हनुमान जी को यह कथा सुनाते हैं) और उत्तर कांड (सर्ग 35–36)।

यह कथा आगे चलकर क्यों महत्वपूर्ण है

रामायण बताती है कि बचपन में हनुमान जी अपनी शक्तियों से इतना खेलते थे कि ऋषियों ने उन्हें उनकी शक्तियाँ भुला दीं, जब तक कोई याद न दिलाए। बहुत साल बाद, जब वानर सेना सागर किनारे पहुँची और लंका में सीता जी को खोजना था, तब ज्ञानी जाम्बवान ने उन्हें यही कथा सुनाई। हनुमान जी को अपनी शक्ति याद आ गई, वे पर्वत जितने बड़े हो गए और सागर लाँघ गए।

बच्चों के लिए सीख: तुम जितना सोचते हो, उससे कहीं ज़्यादा शक्तिशाली हो। कभी-कभी बस किसी अपने की ज़रूरत होती है जो याद दिलाए।

उम्र के अनुसार कैसे सुनाएं

  • 2–5 वर्ष: "बाल हनुमान ने सूरज को आम समझ लिया! वे उसे लेने आकाश तक कूद गए। देवताओं ने उन्हें ख़ास आशीर्वाद दिए, और वे बड़े होकर बहुत शक्तिशाली और दयालु बने।"
  • 6–8 वर्ष: पूरी कथा सुनाएं, फिर पूछें, "तुम्हें सूरज किस चीज़ जैसा लगता है?"
  • 9–10 वर्ष: जाम्बवान वाला दूसरा हिस्सा भी जोड़ें, और बात करें कि कब किसी ने उन पर भरोसा किया था।

माता-पिता के सवाल

हनुमान जी के माता-पिता कौन हैं? उनकी माँ अंजना और पिता पवन देव हैं। इसीलिए उन्हें पवनपुत्र और आंजनेय भी कहते हैं।

हनुमान जी इतने शक्तिशाली क्यों हैं? वे पवन के पुत्र हैं, और सूर्य की ओर छलांग के बाद देवताओं ने उन्हें शक्ति, गति और बुद्धि का वरदान दिया। पर उनकी सबसे बड़ी शक्ति श्री राम के प्रति उनकी भक्ति है।

क्या यह कथा रामायण में है? हाँ। वाल्मीकि रामायण के किष्किन्धा कांड में जाम्बवान यह कथा सुनाते हैं, और उत्तर कांड में यह विस्तार से आती है।

प्रथम प्रणाम पर सुनिए

प्रथम प्रणाम की कहानियाँ में हनुमान जी और श्री राम के अन्य भक्तों की कथाएँ सुनिए।